आज फिर गेस के दाम बढ़ा दिए गए , जब कि आज कच्छे तेल के दाम १०० डॉलर से भी कम हैं। आज देश कि जनता को गम्भीरता से विचार करना होगा कि देश में बढ़ती कीमत कोंग्रेस या बी जे पी. के बस से बाहर क्यों हे। आम आदमी को यह समझना पड़ेगा कि यह दोनों पार्टी रुपय कि गिरती कीमत और देश में बढ़ती कीमत को लगाम क्यों नहीं लगा सकती। क्यों कि इन दोनों पार्टियों कि विदेश निति एक जेसी है। एक ने गेट समझोता किया दूसरी ने डब्ल्यू टी ओ पर हस्ताक्षर किये। कल बी जे पी आ भी जाये तो वो भी विदेशयों के आगे घुटने टेके हुए नज़र आरहे हें। और वाजपेयी जी कि सरकार ने भी बहुत बड़ी संख्या में विदेशी कंपनिया और इम्पोर्ट को बढ़ावा दिया था। ज्ञात रहे चीन ने सिर्फ तकनीक इम्पोर्ट कि है प्रोडक्ट नहीं। भारत का विदेश व्यापार लगभग ६.२ बिलयन डॉलर का निर्यात और १२.७ बिलयन डॉलर का आयात यानि निर्यात के मुकाबले आयात दोगुना है। इस हालात का सीधा मतलब है कि हर साल डॉलर के मुकाबले रुपया कि कीमत दोगुना गिरेगी। सरकार विदेशी कंपनियो के दबाव में ऐसा होने दे रही है , यानि समझौतों के चलते दोनों ही पार्टियां महगाई नहीं रोक सकती। इस देश में इन संधियों को तोडना ज़रूरी है या अपने हितो के मुताबिक मोड़ना ज़रूरी है और यह सिर्फ इस देश कि आम जनता ही कर सकती है ,, इस आगे कि बहस मेरे साथ जल्दी ही देखिये राष्ट्र खबर पर . जय हिन्द
No comments:
Post a Comment