प्रिय मित्रो आज एक संदेश का दिन है। जिस तरह पूरे भारत ने उप चुनाव में कुछ महत्वकांक्षी तत्वों को अपना फैसला सुनाया उस से यह स्पस्ट हो जाता है की देश के तानेबाने को जनता अभी तोडना नहीं चाहती। मगर नरेंद्र मोदी जी के लिए यह ख़ुशी का दिन भी हो सकता है। क्यों की यह उप-चुनाव सिर्फ कोमिनल डाइवर्जन के आधार लड़ा गया। इस से पहले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी जी ने विकाश मॉडल का फार्मूला अपनाया और दूसरी तरफ अमित शाह को उग्र सेनापति के तौर पर सामने रक्खा गया था। और चुनाव जीत के बाद संग द्वुारा अमित शाह को मेन ऑफ़ दा मैच घोसित कर दिया गया। संग के इशारे पर जिस तरह उत्तरप्रदेश में भाजपा के तमाम बड़े नेता किनारे लगा दिए गए। यहाँ तक की राजनाथ सिंह के नाक में भी एक हिडन नकेल डालदी गई। अब इन नतीजों के बाद प्रधानमंत्री को अपना चेहरा बदलने में आसानी होगी। यकीनन संघ का दबाव कम होगा। प्रधानमंत्री जी को अब ग्लैमर की प्रवत्ति से बच कर जनता को डिलीवर करना होगा। मिसाल के तौर पर जिस जीपिंग के आने पर एक भवय ग्लेमराइज़ेशन की तैयारी करली गई है। मीडिया भी ऐसा साबित करने पर उतारू है जैसे चीन का राष्ट्रपति पहली बार भारत आ रहा है। आप जनता की स्मरण शक्ति को इतना कमज़ोर मत समझो की लोक सभा चुनाव के पहले उसी चीन को शेर की दहाड़ से डराने की बात आप जनता को कह रहे थे। और उसी को इतनी इज़्ज़त देने जा रहे हो। जनता अभी भूली नहीं है की चीन के राष्ट्रपति चुनाव से कुछ ही दिन पहले भारत आये थे और मीडिया ने कोई खास तवज्जो तक नहीं दी थी। क्या जनता यह नहीं पूछेगी आज की कल तक जो बेंगन जनता के लिए हराम थे आज मिया जी की थाली में आते ही कैसे हलाल और लज़ीज़ हो गए। मुझे लगता है की अच्छा झूट वही होता है। जिसे बोलने के बाद वक़्त रहते सच करदिया जाए। अब उप चुनाव मॅ हार के बाद नरेंद्र मोदी जी के पास उनका पसंदीदा मौका है खुदमुख्तारी के साथ खुल कर देश हित में काम करे। और संघ के बे हद दबाव को झटक दे। दोस्त ज्ञात रहे की मेने लोकसभा चुनाव के पहले कहा था की चीन के साथ हमारे रिश्ते अभी महत्पूर्ण हैं। जनता और मीडिया को देश हित को ध्यान में रख कर ही कोई इच्छा व्यक्त करनी चाहिए।
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