दोस्तों एक छोटा सवाल है। कोई पत्रकार या विशेषज्ञ या अंध भगत मुझे या देश को यह बताये की इस सरकार ने अमेरिका या जापान में कोनसा सौदा किया जिस भारत पर हर साल विदेशी मुद्रा भंडार में असंतुलन संतुलित होता हो। भारत को हर साल 135.794.49 मिलयन डॉलर की एक्स्ट्रा ज़रुरत होती हे जिस के कारण भारत में महंगाई लगातार बढ़ रही है क्यों की हमारा कुल एक्सपोर्ट है ३१४,४०५.30 मिलयन डॉलर और इम्पोर्ट है ४५०,१९९.79 मिलयन डॉलर है अब इस असंतुलन को कम करने या घाटे के आंकड़े को मुनाफे के आंकड़े में बदलने के लिए कोनसे कदम उठाये हैं। और अगर भारत में विदेशी कम्पनी को भारतीय इन्फरा इस्टक्चर को खरीदने की इजाज़त दी जाती है तो विदेशी कंपनी जो मुनाफा भारत में कमाएगी फिर उसे निकल कर अपने देश लेजाएंगी तब यह घाटा और बढ़ेगा रुपये की कीमत और गिरेगी महंगाई और बढ़ेगी। क्यों की उस मुनाफे के बदले भारत को अपनी ही पैदावार ,खनिज , या कीमती धातुओं से चुकानी पड़ेगी तब मांग और सप्लाई के सिद्धांत के चलते माल की कमी के कारण महंगाई असंतुलित बढ़ेगी। अगर यह कहा जाये जैसा की कहा ही जायेगा की हम तकनीक ला रहे हैं। तब एक सवाल यह बनता है की मेक इन इंडिया का क्या मतलब है। इस के दो तरीके हैं पहला विदेशी तकनीक लाएं और देश में बना कर देश को ही बेचे मुनाफा कमाए। दूसरा यह है की मेक इन इंडिया सेल आउट ऑफ़ इंडिया मिनिमम ७०% तब ज़रूर भारतीय अर्थ वयवस्था को लाब हो सकता है। और एक छोटा सा सवाल खाड़ी के देशो में लगातार हमारा एक्सपोर्ट घट रहा है इम्पोर्ट बढ़ रहा है जो की तेल के रूप में है। इस घटे को काम करने के लिए सरकार ने कोनसे कदम उठाये हैं। माफ़ करना डांस कॉम्पिटिशन से देशों के विकासः नहीं होते बच्चे। जादूगर कमाल पाशा सिर्फ कबूतर मोमबत्ती से निकलते हुए दिखने की कला जनता है। इस का मतलब यह नहीं की वह कबूतर पैदा करना भी जानता है। जय हिन्द
No comments:
Post a Comment