भारत के प्रधानमंत्री को अमेरिका से वार्ता के वक़्त यह भी ध्यान रखने की ज़रुरत है की आज ''शंघाई सहयोग संगठन'' रूस की सरपरस्ती में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ''शंघाई सहयोग संगठन'' अगले बरस भारत और पाकिस्तान को जोड़ कर एक ऐसी प्रणाली को अंजाम देना चाहता है जिस के बाद अमरीकी प्रणाली आधी दुनिया से समाप्त हो जाएगी यह लक्ष्य २०२५ तक प्राप्त करने की योजना तैयार हो चुके हैं। जिसे शंघाई सहयोग संगठन रेशमी आर्थिक पट्टी के माध्यम से अमेरिकी प्रणाली विहीन एक अलग आर्थिक ढांचे के निर्माण की शुरुआत कर चुका है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है की आज अमेरिकी प्रेज़िडेंट से बात चीत में प्रधानमंत्री प्रस्पर आदानप्रदान की चर्चा खुल कर करने की हेसियत में हैं। क्यों की जिस प्रकार शंघाई सहयोग संगठन'' ने ईरान को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद संगठन में आमन्त्रित किया है। इस से साफ़ हो जाता है की आने वाले दिनों में अमरीकी अर्थवयवस्था मुह बाए भारत के बाजार की और देखेगी। जय हिन्द
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