यूनाइटेड नेशन में प्रदानमंत्री जी द्वारा दिए गए दो महत्वपूर्ण बयान जिन्हे में १० में से १० नंबर देता हूँ पहला जो पाकिस्तान को जवाब दिया गया वो दो धारी तलवार का वार था एक तरफ पाकितान को यह बताना की भारत किसी दबाव में नहीं है। और दूसरा वार अमरीका को यह ज्ञात करना की यु इन ओ में मसला उठाने से कुछ हासिल नहीं होगा। इस का मतलब साफ़ है की भारत अमेरिका की कालोनी नहीं है। अच्छा कूटनीतिक प्रयास है। दूसरी सब से बड़ी सफलता चीन को डिप्लोमेटिक थ्रेड देना है। प्रधानमंत्री जी का यह बयान की अब जी ७ जी ८ और ना जाने कितने संगठन है जिन की ज़रुरत नहीं। इस बयान का मतलब साफ़ है की भारत ब्रिक्स संगठन को नकार सकता है। ब्रिक्स के ज़रिये ही चीन अपनी योजनाओ और करंसी को विश्व व्यापी ताकत देना चाहता है। यहां तक की ब्रिक्स के ज़रिये ही चीन अपनी करंसी को डॉलर की जगह रिप्लेस करने की लम्बी योजना तैयार कर चुका है। जिस का शुरूआती कदम संघाई में ब्रिक्स बैंक खोलना है। प्रधानमंत्री सभी संघटनो की ज़रूरत को महत्व ना देना का बयान चीन के साथ भारत को डिप्लोमेटिक बार्गेनिंग करने का अवसर प्रदान कर सकता है। बस इस से ज़ियादा अमेरिकी दौरे को कोई और सफलता मिलेगी मुझे इसकी उम्मीद काम है।
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